Tuesday, April 13, 2021
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जिया हो बिहार के लाला!:नाज करेगा सीतामढ़ी; कैप्टन कमरुल जमां राजपथ पर ब्रह्मोस दस्ते को लीड करेंगे; अब्बू-अम्मी ने कर्ज ले पढ़ाया था



जिया हो बिहार के लाला!:नाज करेगा सीतामढ़ी; कैप्टन कमरुल जमां राजपथ पर ब्रह्मोस दस्ते को लीड करेंगे; अब्बू-अम्मी ने कर्ज ले पढ़ाया

था

सीतामढ़ी के कैप्टन कमरुल जमां कल ब्रह्मोस दस्ते को लीड करेंगे –

दैनिक भास्कर के खबरों के अनुसार

सीतामढ़ी के कैप्टन कमरुल जमां कल ब्रह्मोस दस्ते को लीड करेंगे
थल सेना की मिसाइल रेजिमेंट में तैनात हैं सीतामढ़ी के कैप्टन जमां

इस गणतंत्र दिल्ली के राजपथ पर बिहार का सीतामढ़ी जिला अपनी किस्मत पर नाज करेगा। नाज हो भी क्यों नहीं, इसी जिले का बेटा दुनिया के पहले क्रूज मिसाइल सिस्टम ब्रह्मोस दस्ते को लीड करता हुए दिखेगा। गौरव के इस पल को TV पर निहारने के लिए आज की रात उन आंखों को नींद नहीं आएगी, जिनके आंखों का तारा कैप्टन कमरूल जमां यह कारनामा दिखाएंगा।

सीतामढ़ी जिले के नाहर चौक स्थित रजानगर में चिकन बेचने वाले गुलाम मुस्तफा ने बताया कि पेट काटकर उन्होंने बेटे को फौज में भर्ती कराया। बड़ी गरीबी-मुफलिसी से निकल कर आज उनका बेटा इस मुकाम तक पहुंचा है। पूरा इलाका इस गौरव के पल को निहारने के लिए नजरें जमाए हुआ है। कैप्टन कमरूल जमां से 8 साल छोटी बहन चांदनी की खुशी का तो ठिकाना नहीं है। उनका भइया, ब्रह्मोस और लालकिला….क्या नजारा होगा, इसकी कल्पना से वह फूले नहीं समा रही है।

कैप्टन कमरूल जमां के अब्बा और अम्मी।
कैप्टन कमरूल जमां के अब्बा और अम्मी।
थल सेना की मिसाइल रेजिमेंट में हैं तैनात
इस बार की गणतंत्र दिवस परेड में ब्रह्मोस दस्ते की अगुआई करने जा रहे कैप्टन कमरूल जमां बचपन से ही फौज में जाना चाहते थे। उनके अब्बा मुस्तफा का कहना है कि कमरूल जमां बचपन से ही फौज में जाने का सपना देखते थे। स्कूली शिक्षा सीतामढ़ी के MP हाईस्कूल से पूरी करने के बाद उन्होंने सेना में एक जवान के रूप में ज्वाइन किया। 2012 में वह आर्मी मेडिकल कोर में भर्ती हुए। इसके बाद आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज पुणे से बी.फार्मा का कोर्स पूरा किया। फिर आर्मी कैडेट कॉलेज कमीशन पास कर सेना में अधिकारी बनने में कामयाब रहे। इंडियन मिलिट्री एकेडमी से 2018 में पासआउट होने के बाद वे अभी भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर हैं। इन दिनों थल सेना की मिसाइल रेजिमेंट में तैनात हैं और देश की सेवा कर रहे हैं।

अपनी पत्नी के साथ कैप्टन कमरूल जमां।
अपनी पत्नी के साथ कैप्टन कमरूल जमां।
ड्रेस के लिए कर्ज लेने पड़े थे पैसे
कैप्टन कमरूल जमां के पिता मुस्तफा ने बताया कि बड़ी गरीबी में पलकर उनका बेटा इस ओहदे तक पहुंचा है। एक वक्त था, जब कमरूल जमां के ड्रेस तक के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। कर्ज लेकर किसी तरह ड्रेस खरीदे थे। बेटे की पढ़ाई के लिए कई बार कर्ज लेने पड़े थे। कमरूल जमां घर में सबसे बड़ा लड़का है। छोटी बहन चांदनी भी देश की सेवा करना चाहती है। अभी ग्रेजुएशन करके सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही है।

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