Tuesday, May 11, 2021
Home डेवलपमेंट भारत में हुआ अनोखी खोजः फलों की फोटो देखकर बता देगा कंप्यूटर,...

भारत में हुआ अनोखी खोजः फलों की फोटो देखकर बता देगा कंप्यूटर, क्वॉलिटी अच्छी है या नहीं?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरानगर इलाके की रहने वाली रीसर्च स्कॉलर डॉ. अनुजा भार्गव ने ‘क्वॉलिटी इवोल्यूशन ऑफ फ्रूट्स यूजिंग इमेज प्रॉसेसिंग’ पर शोध कर फलों की गुणवत्ता परखने का नया तरीका खोजा है। इसके तहत फलों की फोटो खींचकर कंप्यूटर के माध्यम से उसकी गुणवत्ता की जानकारी की जा सकेगी। डॉ. अनुजा का मानना है कि इस तकनीक के जरिए आम और सेब जैसे फलों के निर्यात और बड़े उत्पादक कंप्यूटर से ही ग्रेडिंग कर सकेंगे।

इंदिरानगर निवासी डॉ. अनुजा भार्गव जीएलए यूनिवर्सिटी मथुरा में रिसर्च स्कॉलर के पद पर तैनात हैं। उनका शोधपत्र इंटरनैशनल जर्नल मल्टीमीडिया टूल्स ऐंड ऐप्लिकेशन स्प्रिंगर और फूड एनालिटिकल मेथड में इसी साल प्रकाशित हुआ है। उन्होंने आम, केला, सेब, संतरे और एवाकाडो पर शोध किया है। डॉ. अनुजा भार्गव बताती हैं कि आमतौर पर फलों या सब्जी की खरीदारी करते वक्त हम लोग उसे छूकर देखते हैं। फल और सब्जियों में बहुत सारे हाथ लगते हैं, इससे किसी एक को संक्रमण हुआ तो यह बढ़ जाता है। इसको देखते हुए इस विषय पर शोध का खयाल आया।

फोटो लेते ही पता चल जाएगा फल कितने दिन चलेगा
डॉ. अनुजा बताती हैं कि शोध के तहत डिजिटल इमेज प्रॉसेसिंग के बाद सिस्टम फल की फोटो खींचकर पूरी जानकारी देगा। सिस्टम को सुविधाजनक बनाने के लिए रैंक या ग्रेडिंग भी होगी। सिस्टम में दो रैंक का विकल्प होगा। रैंक 1 में उन फलों की जानकारी मिलेगी जिन्हें निर्यात करना होगा या जो एक महीने से अधिक समय तक चल सकें। वहीं, रैंक 2 ऐसे फलों की जानकारी देगा जिनको हफ्ते या दो हफ्तों का इस्तेमाल कर लेना होगा। इससे लेपटॉप या फिर सामान्य डेस्क टॉप कंप्यूटर पर कैमरा लगाकर फल की गुणवत्ता जांच सकते हैं। फलों की प्रॉसेसिंग करने वाली कंपनियों के लिए यह अनुसंधान काफी लाभदायक साबित होगा।

समय भी बचेगा और अच्छे दाम भी मिलेंगे
फलों की गुणवत्ता जांचने के लिए फिलहाल बड़ी कंपनियां बड़ी संख्या में मजदूरों को तैनात करती हैं। जो फलों की गुणवत्ता के हिसाब से उनका चुनाव करते हैं। इससे कई बार खराब फल मार्केट में आते ही हैं, समय भी बहुत खर्च होता है। ऐसे में इमेज प्रॉसेसिंग एक सस्ता और कम समय लेने वाला विकल्प हो सकता है।

दूसरे प्रदेशों में भी काम आएगा शोध
डॉ. अनुजा भार्गव के मुताबिक, लखनऊ सहित अनेक क्षेत्रों में आम काफी मात्रा में होता है। जो देशभर में भेजा जाता है। इसी तरह झालावाड़ में संतरा, गंगानगर में किन्नू, हिमाचल और कश्मीर में सेब बहुतायत से होता है। यहां से फल देशभर में जाते हैं। ऐसे फलों का प्रसंस्करण करने से पहले इमेज से गुणवत्ता का पता लगाना काफी महत्वपूर्ण होगा। इससे फल की वर्तमान स्थिति क्या है और आगे क्या रहेगी यह भी जानकारी मिलेगी। उन्होंने अपना शोध जीएलए विश्वविद्यालय मथुरा के प्रफेसर अतुल बंसल के मार्गदर्शन में पूरा किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

महमदपुर नरसंहार के खिलाफ श्री राजपूत करणी सेना ने हत्यारें का सिर कलम करने पर 5 करोड़ का रखा इनाम।

बिहार के सभी निजी और सरकारी स्कूल दिनांक 19 जून 2021 से 15 जून 2021 तक रहेंगे बंद । इस विषय के साथ वायरल...

सोशल मीडिया पर बिहार विद्यालय शिक्षा बोर्ड के द्वारा जारी किया गया एक लेटर बहुत ही तेजी से वायरल हो रहा है...

भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव के ऊपर लखनऊ में हुआ केस दर्ज। फ़िल्म निर्माता के बेटे को धमकाने का है आरोप

भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव ने फिल्म निर्माता के बेटे को धमकाया, लखनऊ में केस दर्ज-----------------------------------✍️गुड़ंबा कोतवाली में भोजपुरी फिल्म अभिनेता शत्रुघन...

सीतामढ़ी जिले के चोरौत प्रखंड की बेटी रिंकू कुमारी अब बिहार से कई सौ किलोमीटर दूर भारत के असम बॉर्डर पर रहकर करेगी...

चोरौट:- आप सभी को यह बताते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि अभी कुछ ही दिन पहले एसएससी जीडी 2018 का...

Recent Comments